भोगलपुर के जार्डालू आम को राष्ट्रपति को हर वर्ष क्यों उपहार दिया जाता है
भोगलपुर के जार्डालू आम, जिनका जीआई टैग 28 मार्च 2018 को मिला, हर वर्ष राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य वीवीआईपी को भेंट किए जाते हैं। 125 क्विन्टल से अधिक आम देशों के प्रमुख हस्तियों को भेजे जाते हैं।
भोगलपुर के जार्डालू आम की अनूठी सुगंध और मिठास ने उन्हें भारत के राजनैतिक शीर्षस्थ अधिकारियों के बीच लोकप्रिय बना दिया है। प्रधानमंत्री ने ‘मन्न की बात’ में इन आमों की प्रशंसा करके इस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है।
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भोगलपुर के जार्डालू आम, जिनका जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) टैग 28 मार्च 2018 को मिला, हर वर्ष भारतीय राष्ट्रपति तथा अन्य वीवीआईपी, जैसे कि उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, राज्यसभा अध्यक्ष, शासक मंत्री तथा अन्य प्रमुख हस्तियों को उपहार के रूप में भेजे जाते हैं। इस साल 125 क्विन्टल से अधिक आम भेजे गए हैं, जो राज्यों के बीच के व्यापारिक संबंधों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की एक नवीन परंपरा को दर्शाता है।
इस कार्यक्रम का आरंभ 2022 में हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन्न की बात’ में जार्डालू आम की प्रशंसा की। उन्होंने इनका उल्लेख किया, “इस आम की विशिष्ट सुगंध और मिठास को दूरी से ही पहचाना जा सकता है।” इस प्रशंसा ने आमों की लोकप्रियता को और बढ़ाया, जिससे ये स्वयं को वैश्विक बाजारों में स्थापित कर सकें।
मंगलवार 15 जून 2026 को, भोगलपुर के मद्धुबन फ़ार्म में, सुल्तानगंज ब्लॉक के महार्षी-तिलकपुर गांव में जार्डालू आमों की पैदाईश की जाती है। यहाँ, कृषि विभाग के अधिकारियों की निगरानी में ताज़ा आमों को प्लास्टिक के बॉक्स में पैक किया जाता है। यह पहला चरण है, जिसके बाद आमों को बिहार इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (बियादा) के सिकंदरपुर, बिहटा के सुविधा में भेजा जाता है।
बियादा में आमों का वर्गीकरण, ग्रेडिंग और 5‑6 किलो वजनी उपहार बॉक्स में पैकिंग की जाती है। इसके बाद, इन्हें नई दिल्ली के बिहार भवन में भेजा जाता है, जहाँ से राज्य सरकार की ओर से प्रमुख हस्तियों को वितरित किया जाता है। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि हर उपहार बॉक्स ताज़ा और गुणवत्ता वाले आमों से भरा हो।
जार्डालू आम का जीआई टैग भोगलपुर के विशिष्ट जलवायु, मिट्टी और सांस्कृतिक परम्पराओं को मान्यता देता है। इसके विशिष्ट हल्के पीले रंग, रसदार पल्प और मीठा-खट्टा स्वाद को विश्व स्तर पर पहचान मिली है। भोगलपुर और बिहार के लिए यह आम सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक प्रतीक है, जो राज्य के परंपरागत कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित करता है।
इस वर्ष भी, जब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और अन्य वीवीआईपी ने जार्डालू आम को स्वीकार किया, तब इसे भोगलपुर के कृषकों और सरकार के बीच की साझेदारी का प्रतीक माना गया। यह परंपरा आने वाले वर्षों में भी जारी रहने की संभावना है, जिससे भोगलपुर के आमों की प्रतिष्ठा और बढ़ेगी।
सारांशतः, भोगलपुर के जार्डालू आमों को राष्ट्रपति और अन्य प्रमुख हस्तियों को हर वर्ष उपहार देने की परंपरा, भारत के कृषि उत्पादन की समृद्धि और सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक है। यह न केवल आमों की आर्थिक सफलता को दर्शाता है, बल्कि राज्य की वैश्विक कृषि पहचान को भी सुदृढ़ करता है।














