भदौपुर के ज़र्दलू अमरसॉफ़्ट: हर वर्ष राष्ट्रपति को सौंपी जाने वाली ‘भगालपुर की रहस्यमयी भक्ति’
भदौपुर के ज़र्दलू अमर‑माखन को राष्ट्रपति प्रेसिडेंट, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य VVIPs को हर वर्ष भेजी जाती है। इस अनोखी कृषि‑उत्पाद की यात्रा और महत्त्व पर विस्तृत रिपोर्ट।
हर वर्ष भगालपुर की ज़र्दलू अमरसफ़्ट फ़सल हर ऊँचे पद के राजनीतिक नेताओं तक पहुँचती है। मोदी जी के ‘मण की बात’ में इस फसल की प्रशंसा से यह ख़ास स्थिति बनी है।
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भदौपुर के ज़र्दलू अमरसफ़्ट, एक अनोखे नाम वाली आम किस्म, हर वर्ष भारतीय राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा वक्ता, राज्यसभा अध्यक्ष, तथा विभिन्न VVIPs को सौंपा जाता है। यह आम केवल एक फल नहीं, बल्कि बिहार का गर्व और आम फ़सलों का नया युग है।
भदौपुर के भांगलपुर जिले में स्थित दन्तवासी किच्छेरी में खेती की जाने वाली ज़र्दलू अमरसफ़्ट, मिथिलावासी परंपरागत मिट्टी और जलवायु का अनोखा मिश्रण है। इसके अनूठे सुवास और मीठे स्वाद के कारण इसे 28 मार्च 2018 को जियोग्राफ़िकल इंडिकेशन (जीआई) टैग मिला, जिससे यह ‘भदौपुर की औद्योगिक आम’ के रूप में मान्यता प्राप्त हुई।
साल दर साल, 125 क्विन्टल से अधिक ज़र्दलू अमरसफ़्ट की उत्पादन की रिपोर्टिंग होती है, जो लगभग 5-6 किलो के उपहार पैकेट में परिवर्तित होकर VVIPs तक पहुँचाई जाती है। यह प्रक्रिया 8 अप्रैल 2026 को भदौपुर के मादुबीयन फ़ार्म, सुल्तांगंज ब्लॉक के माटो-टोला से शुरू होती है। यहाँ, कृषि विभाग के निरीक्षक उपज को सटीकता से छाँटते और वर्गीकृत करते हैं।
इसके बाद फ़सल को बिठा या बिठाई के पश्चात्, बिठाई कनफ़ेक्शनरी में भेजा जाता है। बिठाई कनफ़ेक्शनरी, जो कि पटना के निकट बिठा पट्टन में स्थित है, यहाँ ज़र्दलू अमरसफ़्ट की सॉर्टिंग, ग्रेडिंग और पैकिंग की जाती है। इस चरण में प्रत्येक बक्सा 5-6 किलो वज़न का होता है, जिसे ‘भदौपुर सरकार के तरफ़ से’ सरकारी नीती के तहत तैयार किया जाता है।
भँडारपुर के बिठा पट्टन के बाद, यह उपहार पैकेट को बिहार भवन, नई दिल्ली में भेजा जाता है। जहाँ इसे राष्ट्रपति और अन्य VVIPs को आधिकारिक रूप से सौंपा जाता है। इस परंपरा का ऊचा मकसद भदौपुर और बिहार के अनोखे जीआई टैक्ड आम की वैश्विक पहचान बढ़ाना है, साथ ही यह फसल उत्पादन के बढ़ते आर्थिक महत्व को दर्शाती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 जून 2026 को अपने ‘मण की बात’ कार्यक्रम में ज़र्दलू अमरसफ़्ट की प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि कैसे इस फसल की विशिष्ट खुशबू और मिठास एक दूरी से ही पहचानने योग्य है। उन्होंने ज़र्दलू अमरसफ़्ट को भारतीय मँडाटरी फलों के वैश्विक बाज़ार तक पहुँचाने के सफल उदाहरण के रूप में भी उल्लेख किया।
इस फसल की बढ़ती मांग के परिणामस्वरूप, सरकारी खेत द्वारा संभाले जाने वाली नवनीकरण और फसल संरक्षण योजनाएँ भी तेज़ी से स्थानीय किसानों के बीच बढ़ रही हैं। ज़र्दलू अमरसफ़्ट का जीआई टैग, बिहार में कृषि तकनीक और घरेलू ऊर्जा के सुदृढ़ीकरण का एक उदाहरण है।
भदौपुर के ज़र्दलू अमरसफ़्ट का रिवाज़, भारत की कृषि नीतियों में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह पारंपरिक फ़सलों को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित बनाने के लिए एक नया मानक स्थापित कर रहा है। इस बड़प्पन के साथ, बिहार सरकार आस्था है कि भविष्य में भी ज़र्दलू अमरसफ़्ट ‘भारत की भूख शान्ति’ के रूप में उभरेगा।















