पाटना उच्च न्यायालय: 7 नए न्यायाधीश और प्रमुख कानूनी निर्णय
पाटना उच्च न्यायालय में सात नए न्यायाधीशों की शपथ ग्रहण और महत्वपूर्ण निर्णयों की रिपोर्ट। फ़ैसल ख़ान की FIR रद्दी और काली सूची पर चर्चा सहित १६ जून २०२६ की नवीनतम खबरें।
पाटना उच्च न्यायालय ने १६ जून को सात नए न्यायाधीशों को शपथ दिलाई तथा हत्या के मामले में ३१९ अनुच्छेद के तहत समन आदेश को रद्द कर दिया।
फ़ैसल ख़ान ने हाई कोर्ट से FIR रद्दी और कोचिंग संस्थान पुनः खोलने की दिशा निर्देश प्राप्त करने हेतु याचिका दायर की है।
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पाटना उच्च न्यायालय ने १५ जून को सात नए न्यायाधीशों को शपथ लेने का आदेश दिया। शपथ समारोह का अध्यक्ष चांसलर महोदय मानिक मेण्डन राय थे। नियुक्तियों में रंजन कुमार झा, कुमार मनीष तथा राज कुमार को स्थायी न्यायाधीश के रूप में नामित किया गया। साथ ही राणा विजय सिंह, विकाश कुमार, गिरीजिश कुमार और आलोक कुमार को अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया। यह घटना केंद्रीय सरकार के १० जून के नोटिफिकेशन के बाद हुई।
उसी दिन, एक एकल न्यायाधीश बेंच ने हत्याकांड में ३१९ अनुच्छेद के तहत मुकदमे के लिए समन जारी करने वाले आदेश को निरस्त कर दिया। न्यायालय ने बताया कि मुअामले की प्रक्रियाएँ “मैलिफाइड क्रियान्वयन” के तहत थीं और ट्रायल कोर्ट द्वारा दिये गये साक्ष्य “अत्यल्प” थे। इस निर्णय के अंतर्गत, मृतक के परिवार पर अब कोई मुकदमे का बोझ नहीं रहेगा।
फैसल ख़ान, एक शिक्षणकर्ता और यूट्यूबर, जिन्होंने अपने कोचिंग सेंटर के खिलाफ पाटना पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR को रद्द कराने के लिए पाटना उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। याचिका में उन्होंने अपने कोचिंग संस्थान के पुनः उद्घाटन के लिए दिशा निर्देश भी मांगे। अदालत ने इस पर विचाराधीन रखने का निर्णय लिया, जिससे उस सेंटर में फिर से कक्षाएँ शुरू होने की उम्मीद जताई गई।
उच्च न्यायालय ने दक्षिण बिहार विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (एसबीपीडीसीएल) द्वारा तीन वर्ष के लिए एक ठेकेदार को काली सूची में डालने और उसकी अनुबंध समाप्ति के आदेश को कायम रखा। न्यायालय ने कहा कि राज्य और उसकी उपयुक्त संस्थाएँ “निर्घारित करती हैं कि ठेकेदारों को काली सूची में डालने का अधिकार मौजूद है, भले ही अनुबंध में यह स्पष्ट प्रावधान न हो।” इस निर्णय से विद्युत परियोजनाओं के ठेकेदारों पर नई कानूनी प्रतिबंध लागू होंगे।
न्यायालय ने एक ई-नीलामी के दौरान स्वचालित रूप से बढ़ाए गए विंडो के भीतर मिले बोली के स्वीकार को भी स्वीकार किया। केवल सुदीर्घ प्रोसेस के तहत विंडो बढ़ाया गया, जिससे किसी मैन्युअल हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं रही। यह निर्णय यहाँ पर एजेंसी अधिसूचना के तहत पाटना उच्च न्यायालय के प्रशासकीय प्रोटोकॉल को मजबूत करता है।
अदालत की एक पेचीदगी भरी घटना में, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने एक आपराधिक संशोधन याचिका को “वापस लिया गया” कहकर खारिज करने के आदेश को रद्द कर दिया। न्यायालय ने माना कि वकील की बार-बार असफलता के बावजूद लंबे समय से लंबित मामलों को फिर से खोला नहीं जाना चाहिए। इसका मतलब है कि भविष्य में इसी प्रकार के मामलों में भी न्यायप्रणाली को अधिक सख्त धारणाएँ अपनानी होंगी।
अंत में, चांसलर सभा के एक सत्र में, चांसलर सगाम कुमार साहू ने पाटना उच्च न्यायालय को “न्याय का मंदिर” कहा। उन्होंने अपने करियर के दौरान पाटना में न्याय के प्रति समर्पित निवेदन किया और बिहार में न्याय की नई सूरत दिखाने की बात की। यह संबोधन ४ जून को हुआ, जब उन्होंने अपने खाली समय के बारे में बताया।
इन सभी घटनाओं से स्पष्ट है कि पाटना उच्च न्यायालय न केवल नए न्यायाधीशों को जोड़ रहा है, बल्कि विभिन्न महत्वपूर्ण कानूनी निर्णयों के माध्यम से राष्ट्रीय न्यायिक प्रबंधन में सुधार भी कर रहा है। इन निर्णयों का प्रभाव साक्षात्कारियों और वकील समुदाय पर गहरा पड़ेगा, और आगामी मुकदमों में नए मानदंड स्थापित करेगा।
Source: https://www.livelaw.in/high-court/patna-high-court















