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Kisan Credit Card Limit : घर बैठे बनवाएं किसान क्रेडिट कार्ड और मिलेगा 5 लाख रुपये का फायदा, यहां जानें प्रक्रिया

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Kisan Credit Card: Farmers get a loan of Rs 5 lakh at just 4% interest, avail the benefit like this
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Increase in KCC limit in Budget 2025-26: बजट-2025 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किसानों के लिए बड़ा ऐलान किया है। सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट 3 लाख से बढ़ाकर 5 लाख कर दी है। ऐसे में किसान अब 1 अप्रैल 2025 से 5 लाख तक के लोन के लिए आवेदन कर सकेंगे। इससे करोड़ों किसानों को फायदा होगा। यहां जानें क्या है किसान क्रेडिट कार्ड और इसके लिए कैसे करें आवेदन।

किसान क्रेडिट कार्ड के क्या हैं फायदे

किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए किसानों को उनके खेती के काम के लिए जरूरत के हिसाब से लोन दिया जाता है। इसमें किसानों को कम ब्याज दरों पर लोन मिलता है, जिससे उनकी आर्थिक जरूरतें आसानी से पूरी हो जाती हैं। वहीं, समय पर लोन चुकाने पर सरकार ब्याज पर 3 फीसदी की छूट देती है, जिससे किसानों को आर्थिक राहत मिलती है।

डेबिट कार्ड और फसल बीमा

केसीसी से जुड़े RuPay कार्ड के जरिए किसान ATM से पैसे निकाल सकते हैं और डिजिटल पेमेंट भी कर सकते हैं। इसके अलावा केसीसी धारक किसानों की फसलों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के तहत कवर किया जा सकता है।

केसीसी के पैसे का कहां इस्तेमाल कर सकते हैं?

केसीसी का पैसा खेती के लिए दिया जाता है। ऐसे में किसान केसीसी लिमिट का इस्तेमाल खेती के लिए बीज, खाद, कीटनाशक और डीएपी खरीदने में कर सकते हैं।

कैसे करें आवेदन?

किसान क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करने का तरीका बेहद आसान है। आप इसके लिए ऑफलाइन और ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। किसान क्रेडिट कार्ड के लिए किसी भी बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक और कोऑपरेटिव में आवेदन किया जा सकता है।

ये दस्तावेज हैं जरूरी

किसान क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करने के लिए आपके पास पहचान प्रमाण (आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस आदि), पते का प्रमाण (आधार कार्ड, राशन कार्ड, बिजली बिल, पानी का बिल आदि) होना चाहिए। इसके अलावा जमीन के मालिकाना हक/काश्तकारी का प्रमाण, किसान के नाम पर जमीन का रिकॉर्ड (खतौनी, जमाबंदी, पट्टा आदि), अगर किसान काश्तकार है तो काश्तकारी का वैध दस्तावेज होना चाहिए। चूंकि यह एक सुरक्षित ऋण है, इसलिए किसानों को ऋण राशि के बराबर मूल्य की संपार्श्विक वस्तु की आवश्यकता होती है।

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