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RBI के नए गवर्नर संजय मल्होत्रा पहली बार करेंगे MPC बैठक की अध्यक्षता, घट सकता है रेपो रेट

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RBI के नए गवर्नर संजय मल्होत्रा पहली बार करेंगे MPC बैठक की अध्यक्षता, घट सकता है रेपो रेट
RBI के नए गवर्नर संजय मल्होत्रा पहली बार करेंगे MPC बैठक की अध्यक्षता, घट सकता है रेपो रेट

RBI MPC Meeting: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) रिसर्च के अनुसार, इस चक्र में कुल 75 आधार अंकों की कटौती हो सकती है, जिसमें अगली कटौती अक्टूबर 2025 में संभावित है.

RBI MPC Meeting: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक आज, 5 फरवरी 2025 से शुरू हो रही है. इस बैठक की अध्यक्षता पहली बार बने RBI के नए गवर्नर संजय मल्होत्रा करेंगे, जिन्होंने दिसंबर 2024 में पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास की जगह ली थी. बैठक के नतीजों की घोषणा 7 फरवरी 2025 को की जाएगी, जिसमें ब्याज दरों पर लिए गए फैसलों का खुलासा होगा.

ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) रिसर्च के अनुसार, इस चक्र में कुल 75 आधार अंकों की कटौती हो सकती है, जिसमें अगली कटौती अक्टूबर 2025 में संभावित है. हालांकि, इक्रा की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्याज दरों में कटौती का फैसला अप्रैल या जून 2025 तक टल सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत दिख रहे हैं, लेकिन वैश्विक घटनाक्रम और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी को देखते हुए आरबीआई जल्दबाजी में फैसला नहीं लेना चाहेगा.

अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ्तार

वर्तमान में भारत की आर्थिक वृद्धि दर चार साल के निचले स्तर पर है. महंगाई दर भी लगातार 5% से ऊपर बनी हुई है, हालांकि कोर मुद्रास्फीति स्थिर रही है. दिसंबर 2024 में हुई पिछली एमपीसी बैठक में नकद आरक्षित अनुपात (CRR) में 50 आधार अंकों की कटौती की गई थी, जिससे बैंकों के पास अधिक नकदी उपलब्ध हुई थी.

महंगाई नियंत्रण में, पर RBI सतर्क

रिजर्व बैंक का मुख्य लक्ष्य मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना है, जिसे 2% से 6% के दायरे में बनाए रखना जरूरी है. दिसंबर 2024 में खुदरा महंगाई दर घटकर 5.22% पर आ गई थी, जो आरबीआई के तय दायरे के भीतर है. हालांकि, RBI ने वित्त वर्ष 2025 के लिए मुद्रास्फीति अनुमान को 4.5% से बढ़ाकर 4.8% कर दिया है, जो महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती को दिखाता है.

बाजार की नजर एमपीसी के फैसले पर

एक्सपर्ट्स का मानना है कि दरों में कटौती से खपत और मांग को बढ़ावा मिलेगा, खासकर ऐसे समय में जब सरकार ने मध्यम वर्ग को कर छूट दी है. वहीं, आरबीआई ने बैंकिंग सिस्टम में 1.5 लाख करोड़ रुपये की नकदी डालने की घोषणा की है और 5 बिलियन डॉलर की स्वैप नीलामी भी करेगा. अब बाजार की नजरें 7 फरवरी को होने वाली घोषणा पर टिकी हैं.

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