
RBI ने 1 अप्रैल 2025 को Master Circular जारी किया है, वो Primary (Urban) Co-operative Banks (UCBs) के लिए गारंटी (Guarantees), को-एक्सेप्टेंस (Co-Acceptance) और Letters of Credit (LCs) से जुड़े नए नियम जारी किए है.
क्या कहता है Master Circular-यह सर्कुलर RBI ने 1 अप्रैल 2025 को जारी किया है, जिसमें UCBs यानी (Urban) Co-operative Banks) को ये बताया गया है कि वे कैसे बैंक गारंटी दें और को-एक्सेप्टेंस करें (बिल्स की गारंटी लें), और Letter of Credit (LC) जारी करें.
अगर आसान शब्दों में बात करें तो- अगर आप किसी UCB यानी (Urban) Co-operative Banks (UCBs) से कारोबार के लिए गारंटी या LC यानी Letter of Credit लेना चाहते हैं तो बैंक आपकी आर्थिक स्थिति और ज़रूरत की अच्छे से जांच करेगा.
सिर्फ भरोसेमंद और पुरानी ग्राहक प्रोफाइल वालों को ही ये सुविधाएं मिलेंगी. अगर आपने बैंक गारंटी दिलवाई है, और आपके लेन-देन में कोई दिक्कत आती है, तो बैंक की जिम्मेदारी होगी कि वो समय पर भुगतान करे.
इसको कुछ ऐसे समझतें है- बैंक गारंटी:-सिर्फ फाइनेंशियल गारंटी दें, परफॉर्मेंस गारंटी नहीं (कुछ मामलों में दी जा सकती है लेकिन सावधानी के साथ).
10 साल से अधिक की अवधि की गारंटी नहीं होनी चाहिए.कुल गारंटी बैंक के खुद के फंड का 10% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.
सिक्योर गारंटी को प्राथमिकता दी जाए यानी कैश या सरकार की बैकिंग हो.अनसिक्योर गारंटी सीमित मात्रा में और बहुत सोच-समझकर दें.
को-एक्सेप्टेंस (Bill की गारंटी देना):-सिर्फ उन्हीं ग्राहकों के लिए करें जिनके पास पहले से क्रेडिट लिमिट है.फर्जी बिलों (Accommodation Bills) से बचें. बिल के पीछे असली व्यापार होना चाहिए और वास्तव में ग्राहक को मिलना चाहिए.
Letters of Credit (LC):-सिर्फ उन्हीं ग्राहकों के लिए ओपन करें जो पहले से बैंक के नियमित ग्राहक हों.केवल आवश्यक मात्रा में और सुरक्षा के साथ जारी किए जाएं.LCs पर तुरंत पेमेंट की जिम्मेदारी निभानी होगी, नहीं तो बैंक की साख पर असर पड़ेगा.
अन्य जरूरी बातें:-इन सुविधाओं के चलते बैंक के जोखिम न बढ़ें इसके लिए internal checks और monitoring systems मजबूत रखें.अगर कोई LC या गारंटी फर्जी तरीके से जारी हुई हो और बैंक को नुकसान हो तो संबंधित अफसरों पर कार्रवाई करें.
चलते चलते आपको Letters of Credit (LC) के बारे में बताते हैं…
Letters of Credit (LC) यानी लोन लेटर, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कभी-कभी घरेलू व्यापार में इस्तेमाल होने वाला एक बैंकिंग दस्तावेज होता है, जो एक तरह की बैंक गारंटी का काम करता है.Letter of Credit (LC) एक बैंक द्वारा जारी किया गया वादा होता है कि वह अपने ग्राहक (Buyer/Importer) की ओर से एक निश्चित राशि का भुगतान करेगा, बशर्ते कि विक्रेता (Seller/Exporter) कुछ निर्धारित दस्तावेज़ प्रस्तुत कर दे.
आसान भाषा में कहें तो – LC एक भरोसा है जो बैंक देता है कि “अगर मेरा ग्राहक तय शर्तों को पूरा करता है, तो मैं आपके पैसे समय पर चुका दूंगा.मान लीजिए एक भारतीय कंपनी चीन से मशीनरी मंगवा रही है. चीन की कंपनी भारत की कंपनी पर भरोसा नहीं कर पा रही कि वह पेमेंट करेगी या नहीं. ऐसे में:-भारतीय कंपनी अपने बैंक से Letter of Credit जारी करवाती है.बैंक यह वादा करता है कि अगर चीन की कंपनी ने सामान भेजने और डॉक्युमेंट्स देने की शर्तें पूरी कर दीं, तो बैंक पेमेंट कर देगा.इससे चीन की कंपनी को भरोसा हो जाता है और वह सामान भेज देती है.डॉक्युमेंट्स मिलने के बाद बैंक पेमेंट कर देता है.
LC के अंतर्गत कौन-कौन से डॉक्युमेंट्स लगते हैं?
- बिल ऑफ लैडिंग (B/L)
- इनवॉयस (Invoice)
- पैकिंग लिस्ट
- बीमा दस्तावेज़
- ओरिजिन सर्टिफिकेट
- कस्टम क्लीयरेंस आदि
LC क्यों ज़रूरी होता है?भरोसे की गारंटी देता है.बिना एडवांस पेमेंट के व्यापार संभव बनाता है.रिस्क को कम करता है –खासकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार में.
Loan से इसका क्या रिश्ता है?अगर आपने बिज़नेस के लिए LC खोला है, तो यह एक प्रकार का अप्रत्यक्ष लोन माना जा सकता है.बैंक आपके लिए रिस्क ले रहा है, और इसके लिए मार्जिन मनी, चार्ज, और कोलैटरल भी मांग सकता है.अगर आप LC के अनुसार पेमेंट नहीं करते, तो बैंक आपसे वसूली करेगा.