पटना हाई कोर्ट ने पोक्सो मामले में दोषी को बरी कर दिया है, क्योंकि चिकित्सा साक्ष्य ने पीड़िता के पूर्व यौन अनुभव को दिखाया और कोई चोट के निशान नहीं मिले। इस मामले में न्यायमूर्ति बिबेक चौधरी और न्यायमूर्ति अन्षुमन ने फैसला सुनाया।
कोर्ट ने कहा कि चिकित्सा अधिकारी ने पीड़िता के शरीर पर कोई हिंसा का निशान नहीं पाया, लेकिन पाया कि उसके योनि में पहले से ही यौन संबंध बनाने के निशान थे। यह मामला पोक्सो अधिनियम के तहत दर्ज किया गया था और पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था।
मामले की जांच
पुलिस ने मामले की जांच की और पाया कि पीड़िता ने पहले भी यौन संबंध बनाए थे। इसके बाद कोर्ट ने फैसला सुनाया कि आरोपी को बरी किया जाए। इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि चिकित्सा साक्ष्य और पीड़िता के बयान को महत्व दिया जाना चाहिए।
न्यायमूर्ति बिबेक चौधरी ने कहा कि “चिकित्सा साक्ष्य ने पीड़िता के पूर्व यौन अनुभव को दिखाया है और कोई चोट के निशान नहीं मिले हैं। इसलिए, हमें लगता है कि आरोपी को बरी किया जाना चाहिए।”
पोक्सो अधिनियम
पोक्सो अधिनियम बच्चों के यौन शोषण के खिलाफ बनाया गया है। इस अधिनियम के तहत, यदि कोई व्यक्ति 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे के साथ यौन संबंध बनाता है, तो उसे दोषी माना जाता है।
इस मामले में, पीड़िता की आयु 16 वर्ष थी और आरोपी ने उसके साथ यौन संबंध बनाए थे। लेकिन चिकित्सा साक्ष्य ने पीड़िता के पूर्व यौन अनुभव को दिखाया और कोई चोट के निशान नहीं मिले, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आरोपी को बरी किया जाना चाहिए।
आपको बता दें कि पटना में ऐसे मामले अक्सर सुनने को मिलते हैं और पुलिस और कोर्ट को ऐसे मामलों में सख्ती से निपटना होता है।








