पटना उच्च न्यायालय ने आरा अदालत विस्फोट मामले में मौत की सजा सुनाए गए व्यक्ति को बरी किया है। यह मामला 23 दिसंबर 2015 का है, जब आरा की अदालत में विस्फोट हुआ था, जिसमें 2 लोग मारे गए थे और 6 घायल हुए थे।
इस मामले में पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने कहा कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं है, इसलिए उन्हें बरी किया जा रहा है। यह निर्णय 26 मार्च 2026 को सुनाया गया था।
आरा अदालत विस्फोट मामले का इतिहास
आरा अदालत विस्फोट मामला 23 दिसंबर 2015 को हुआ था, जब आरा की अदालत में एक विस्फोट हुआ था। इस विस्फोट में 2 लोग मारे गए थे और 6 घायल हुए थे। इस मामले में पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें से 1 व्यक्ति को मौत की सजा सुनाई गई थी।
इस मामले की जांच पटना पुलिस ने की थी, जिन्होंने 2016 में आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद, मामला पटना उच्च न्यायालय में पहुंचा, जहां न्यायाधीश ने आरोपी को बरी किया है।
पटना उच्च न्यायालय का निर्णय
पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने कहा कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं है, इसलिए उन्हें बरी किया जा रहा है। यह निर्णय 26 मार्च 2026 को सुनाया गया था। न्यायाधीश ने कहा कि अदालत ने सभी साक्ष्यों को ध्यान से देखा है और पाया है कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं है।
इस निर्णय के बाद, आरोपी के वकील ने कहा कि यह निर्णय न्याय की जीत है। उन्होंने कहा कि उनका मुवक्किल हमेशा से ही निर्दोष था और अदालत ने उन्हें निर्दोष घोषित किया है।
आपको बता दें कि बिहार में अपराध के मामले में पटना उच्च न्यायालय का यह निर्णय एक महत्वपूर्ण निर्णय है। यह निर्णय यह दिखाता है कि अदालतें न्याय के लिए प्रतिबद्ध हैं और आरोपियों को निर्दोष घोषित करने में नहीं हिचकिचाती हैं।








