पटना हाई कोर्ट में सात वकीलों को न्यायाधीश नियुक्त, महत्वपूर्ण आदेश और न्यायिक पहलुओं की अपडेट
पटना हाई कोर्ट ने सात वकीलों को न्यायाधीश नियुक्त किया, 319 सीआरपीसी के तहत मुकदमे को रद्द किया और कई महत्वपूर्ण फैसले सुने, जानिए विस्तार से।
पटना हाई कोर्ट में सात वकीलों को न्यायाधीश और अतिरिक्त न्यायाधिश के रूप में शपथ दिलाई गई। कोर्ट ने 319 सीआरपीसी के तहत जारी निलंबन आदेश को रद्द किया और कई अन्य महत्त्वपूर्ण मामले तय किए।
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पटना हाई कोर्ट ने 15 जून, 2026 को सात वकीलों को न्यायाधीश एवं अतिरिक्त न्यायाधीश के पद पर शपथ दिलाई। शपथ समारोह में मुख्य न्यायाधीश श्रीमती मीणाक्षी मदन राय ने नया न्यायिक संयोजन को आधिकारिक रूप से ग्रहण किया। नियुक्त न्यायाधीशों में न्यायाधीश रंजन कुमार झा, न्यायाधीश कुमार मनिष और न्यायाधीश राज कुमार को सताधिकारपुर्वक नियुक्त किया गया, जबकि न्यायाधीश राणा विक्रम सिंह, न्यायाधीश विकास कुमार, न्यायाधीश गिरिजिश कुमार और न्यायाधीश आलोक कुमार को अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में घोषित किया गया। यह नियुक्ति केंद्र सरकार ने 10 जून, 2026 को राष्ट्रीय स्तर पर जारी नोटिफिकेशन के माध्यम से सार्वजनिक की थी।
एक ही दिन, पटना हाई कोर्ट ने 319 भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के तहत एक हत्या मामले में आरोपी को बुलाने वाले आदेश को रद्द किया। कोर्ट ने कहा कि इस आदेश को कई स्तरों पर दुर्भावनापूर्ण उद्देश्यों से चलाया गया था और प्राथमिक न्यायालय द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य “अत्यंत अपर्याप्त” थे, जिससे 319 सीआरपीसी की प्रवर्तन शक्ति का प्रयोग असंगत माना गया। इस निर्णय में एकल न्यायाधीश बेंच, न्यायाधीश अंसुल ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया में निष्पक्षता और साक्ष्य की स्पष्टता अनिवार्य है, अन्यथा ऐसी आदेश वैध नहीं ठहराए जा सकते।
केन्द्र सरकार ने उसी सप्ताह, 10 जून, 2026 को सात वकीलों को पटना हाई कोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त करने का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया। इस नोटिफिकेशन में रंजन कुमार झा, कुमार मनिष और राज कुमार को स्थायी न्यायाधीश तथा राणा विक्रम सिंह, विकास कुमार, गिरिजिश कुमार और आलोक कुमार को अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया। नोटिफिकेशन में यह भी बताया गया कि नियुक्ति प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 217 और 224 के तहत हुई है, जिसमें केंद्र सरकार की संस्तुति और सर्वोच्च न्यायालय की स्वीकृति अनिवार्य थी।
साथ ही, शैक्षणिक क्षेत्र में लोकप्रिय यूट्यूबर और कोचिंग संस्थापक फ़ैसल खान, जिन्हें आमतौर पर “खान सर” के नाम से जाना जाता है, ने पटना हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की। खान सर ने अपने खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की मांग की, जो उनके संस्थान पर हिंसा की घटनाओं के बाद दायर हुई थी। उन्होंने कोर्ट से यह भी निर्देश मांगा कि उनके कोचिंग संस्थान को पुनः खोलने की अनुमति दी जाए, जो इसी घटना के कारण बंद हो गया था। यह याचिका उच्च न्यायालय के एक टीम के समक्ष सुनवाई के लिए प्रस्तुत की गई है, जहाँ न्यायाधीशों को इस मामले की जटिलताओं पर विचार करना है।
पटना हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू ने 4 जून, 2026 को अपने विदाई भाषण में कोर्ट को “न्याय का मंदिर” कहा। उन्होंने कहा कि जब वह 6 जनवरी को ओडिशा हाई कोर्ट से स्थानांतरण के बाद पटना पहुंचे तो उनका लक्ष्य न्याय के प्रति कर्तव्य एवं उत्तरदायित्व को पूर्ण करना था। साहू जी ने कोर्ट द्वारा किए गए कई सामाजिक एवं न्यायिक सुधारों का उल्लेख किया, जिसमें महिला अधिकार संरक्षण, पर्यावरणीय न्याय और डिजिटल न्याय प्रणाली का विस्तार शामिल है।
15 जून, 2026 को मुख्य न्यायाधीश मीणाक्षी मदन राय ने पटना हाई कोर्ट की नई समिति का गठन किया, जिसमें न्यायिक प्रशासन को सुगम बनाने के लिए नवीनतम तकनीकी उपायों को अपनाया गया। इस समिति में न्यायालयिक प्रक्रियाओं को तेज करने, फाइलों के इलेक्ट्रॉनिककरण और कॉपीराइट मामलों में विशेषज्ञता बढ़ाने के प्रस्ताव शामिल हैं। मीणाक्षी मदन राय ने कहा कि यह पहल न्यायिक प्रणाली की पारदर्शिता और पहुंच को बढ़ाएगी, विशेषकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले नागरिकों के लिए।
न्यायालय ने दक्षिण बिहार पावर वितरण कंपनी लिमिटेड (एसबीपीडीसीएल) द्वारा एक ठेकेदार को तीन वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट करने और पावर सबस्टेशन निर्माण के अनुबंध समाप्त करने के आदेश को भी समर्थन दिया। कोर्ट ने कहा कि राज्य और उसके संस्थानों को बिना स्पष्ट अनुबंधीय धाराओं के भी ब्लैकलिस्ट करने का स्वाभाविक कार्यकारी अधिकार रहता है। इस निर्णय में न्यायाधीशों ने कहा कि उद्यमी की विश्वसनीयता और सार्वजनिक हित को संरक्षित करने के लिये ऐसी कार्रवाई आवश्यक हो सकती है।
पटना हाई कोर्ट ने एक ई-ऑक्शन विंडो में सैंड घाट के निपटान के लिए जमा किए गए बिड को स्वीकार किया, यह निर्णय दो न्यायाधीशों की डिवीजन बेंच ने सुनाया। बिंदु यह था कि स्वचालित विस्तार मेकैनिज्म ने समान रूप से और सिस्टम-ड्रिवेन प्रक्रिया के तहत काम किया, जिसमें कोई मानव हस्तक्षेप नहीं था। इस प्रक्रिया में ई-ऑक्शन के नियमानुसार सभी बोलीदाताओं को बराबर अवसर मिला और कोर्ट ने इस बात की पुष्टि की कि विस्तारित विंडो में भी कानून के सिद्धांतों का उल्लंघन नहीं हुआ।
इन सभी घटनाओं के बीच, केंद्र सरकार ने 2 जून, 2026 को सिकोम हाई कोर्ट के न्यायाधीश मीणाक्षी मदन राय को सिकोम हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया, जिससे वह अपने पूर्व पद से पदस्थापित हुईं। यह नियुक्ति भारत के संविधान के अनुच्छेद 124 के तहत की गई थी, जिसमें मुख्य न्यायाधीश के पद पर नियुक्ति के लिए मुख्य न्यायाधीश की सिफ़ारिश अनिवार्य होती है। इस नियुक्ति के बाद मीणाक्षी मदन राय ने अपने अनुभव को लेकर पटना हाई कोर्ट की न्यायिक प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ करने का वादा किया।
सारांश में, पटना हाई कोर्ट ने इस सप्ताह कई महत्वपूर्ण कदम उठाए: सात वकीलों की शपथ ली, 319 सीआरपीसी के तहत निलंबन आदेश को रद्द किया, कोचिंग संस्थान के मालिक खान सर की FIR को चुनौती दी, और प्रशासनिक सुधारों के लिये नई समितियों का गठन किया। ये निर्णय न्यायिक पारदर्शिता, प्रक्रिया की निष्पक्षता और सार्वजनिक हित की सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण मील के पत्थर स्थापित करते हैं। आगामी दिनों में इन निर्णयों के प्रभाव को देखना रूचिकर रहेगा, क्योंकि ये न केवल पटना हाई कोर्ट की कार्यप्रणाली को बल्कि पूरे बिहार के न्यायिक माहौल को भी गहराई से प्रभावित करेंगे।
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