अयोग्यता सूची जारी, 12 अप्रैल 2026 को
पटना में आज दोपहर, जिला समाज कल्याण अधिकारी रजत सिंह ने 12 अप्रैल 2026 को लागू मुख्यमंत्री लड़की बहिण योजना की अयोग्यता सूची प्रकाशित की। सूची में 3,842 नाम शामिल हैं, जिनमें से अधिकांश गाँव‑देहात के आवेदकों का नाम है। उसने कहा, “हमने नियमों के आधार पर छान‑बीन की है, परन्तु कई अनुरोधों को अभी भी सुलझाना बाकी है।”
विरोध गठित, स्थानीय नेता भी बोले
ग्राम विकास परिषद (गवर्नर) के सदस्य शशीत सिंह ने घोषणा के बाद तुरंत विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा, “ये अयोग्यता सामाजिक बर्बादी को बढ़ावा दे रही है।” शशीत सिंह ने 18:30 बजे पटना महाविद्यालय के मैदान में आंदोलन शुरू किया।
योजना के मूल उद्देश्य और वित्तीय आँकड़े
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2023 में इस योजना को ₹2,500 करोड़ की बजट के साथ शुरू किया था। प्रत्येक पात्र लड़की‑बहिन को वार्षिक ₹15,000 की आर्थिक सहायता मिलने की व्यवस्था है। पहले वर्ष में 2,10,000 परिवारों को लाभ मिला, जिसके बाद 2024‑25 में यह नंबर 2,58,937 तक बढ़ा।
अयोग्यता के मानदंडों पर नई सवाल उठे
आवेदन फॉर्म में बताई गई आय सीमा ₹2,00,000 थी, पर रजत सिंह ने बताया कि आय सीमा के अलावा साक्षात्कार अंक भी तय किए गए थे। कुल 5,123 आँकड़े अनियमित पाए गए, जिससे अयोग्य घोषित किए गए।
कानूनी चुनौती की संभावना
बिहार उच्च न्यायालय के वकील सविता अग्रवाल ने कहा, “यदि योजना में पारदर्शिता नहीं दिखेगी, तो यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा सकता है।” उन्होंने 20 अप्रैल को उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करने की तैयारी बताई।
सहयोगी राज्य सरकार की प्रतिक्रिया
उद्यानबांध, झारखंड के समान योजना अधिकारी इंद्रजीत दास ने बताया कि “हम भी समान मानदंडों पर काम कर रहे हैं, पर बिहार में डेटा सत्यापन में समस्या दिख रही है।” उन्होंने झारखंड सरकार की आधिकारिक सूचना अधिसूचना का उल्लेख किया।
आवेदन प्रक्रिया में नई तकनीक अपनाई गई
जनवरी 2026 में योजना पोर्टल पर बायोमैटरिक सत्यापन जोड़ दिया गया था। इससे 78% फ़ॉर्म ऑनलाइन जमा हुए। फिर भी 22% ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल डिवाइस की कमी की वजह से कागज़ी फॉर्म उपयोग किया गया।
स्थानीय बैंक ने राहत योजना शुरू की
पटना स्थित बीएसआर को‐ऑपरेटर बैंक ने 25 मार्च को विशेष काउंटर खोलकर पेंशन‑प्राप्त महिला‑बहिनों को तुरंत ₹5,000 अग्रिम दिया। इस पहल से 1,120 लाभार्थियों को तुरंत मदद मिली।
समुदाय के सामने असंतोष
छत्रपति नगर की 28‑वर्षीय आयशा मुस्तफ़ा ने कहा, “मैंने 2025 में फॉर्म भरा, पर अभी तक मेरा नाम नहीं आया।” उन्होंने 15 अप्रैल को स्थानीय अधिकारियों से मिलकर शिकायत दर्ज करवाई।
भविष्य में योजना सुधार की मांग
भविष्य के सुधार प्रस्ताव में आय सीमा को ₹3,00,000 तक बढ़ाने और महिला साक्षरता दर को 85% तक ले जाने की मांग है। इन प्रस्तावों को मुख्यमंत्री के कार्यालय ने अगले महीने समिति में चर्चा करने का वादा किया।
पुनःजांच का आदेश, नई तारीख तय
मुख्य सचिव सामाजिक कल्याण, डॉ. अजय नेरवाल ने 22 अप्रैल को नई अयोग्यता सूची के लिये 30 दिन की समयसीमा घोषित की। उन्होंने कहा, “हम सभी अपीलों को सख़्ती से देखेंगे, और निष्पक्ष निर्णय लेंगे।”
समग्र प्रभाव और आर्थिक लाभ
एक आर्थिक सर्वे में पता चला कि इस योजना के कारण ग्रामीण महिला कार्यबल में 12% की वृद्धि हुई है। साथ ही, बच्चियों की स्कूल दर में 9% का सुधार देखा गया। रिपोर्ट ने यह भी कहा कि कुल ₹1,970 करोड़ का सामाजिक निवेश हुआ।
अंतिम टिप्पणी और आगे की दिशा
और अगर पुनःजांच में भी विवाद बना रहता है, तो यह योजना के भविष्य को खतरे में डाल सकता है। लेकिन बिहार सरकार ने अब तक के आँकड़े भरोसेमंद बताए हैं, और यह कहा गया कि “यह योजना राज्य की सामाजिक प्रगति की रीढ़ है।”
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