महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘लाड़की बहिन’ योजना के तहत 68 लाख लाभार्थियों के खाते ई-केवाईसी (e-KYC) अपडेट न करने के कारण बंद कर दिए गए हैं। अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी। इस कदम से राज्य में महिलाओं के बीच चिंता का माहौल है, क्योंकि इस योजना के तहत उन्हें वार्षिक वित्तीय सहायता मिलती है।
68 लाख खातों पर ई-केवाईसी का अभाव
महाराष्ट्र महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव, श्री अजय कुमार ने बताया कि 31 मार्च 2026 तक ई-केवाईसी अपडेट करने की अंतिम तिथि थी। “हमने कई बार लाभार्थियों को ई-केवाईसी अपडेट करने के लिए कहा, लेकिन 68 लाख लोगों ने इस पर ध्यान नहीं दिया,” उन्होंने कहा। इस योजना के तहत, पात्र महिलाओं को प्रति वर्ष ₹25,000 की वित्तीय सहायता मिलती है, जिसका उद्देश्य उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
और, यह कार्रवाई उन लाभार्थियों के खिलाफ की गई है जिन्होंने योजना के तहत अपनी पहचान और पते का सत्यापन करने के लिए आवश्यक ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं की। इस प्रक्रिया में आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक खाते की जानकारी को ऑनलाइन सत्यापित करना शामिल है।
योजना की शुरुआत और उद्देश्य
‘लाड़की बहिन’ योजना की शुरुआत 15 अगस्त 2024 को महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा की गई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाना और उन्हें सशक्त बनाना था। योजना के तहत, 18 से 60 वर्ष की आयु की सभी महिलाओं को पात्र माना गया था, जिनके पास आधार कार्ड और बैंक खाता है।
लेकिन, योजना के कार्यान्वयन में कई चुनौतियां आईं, जिनमें से एक ई-केवाईसी प्रक्रिया को पूरा करना था। कई महिलाओं को ई-केवाईसी प्रक्रिया के बारे में जानकारी नहीं थी, जबकि कुछ के पास आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे।
प्रभावित लाभार्थियों की प्रतिक्रिया
पुणे की निवासी श्रीमती राधिका देशमुख, जिनकी योजना के तहत खाता बंद कर दिया गया है, ने कहा, “मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी कि ई-केवाईसी अपडेट करना इतना महत्वपूर्ण है। अब मुझे इस योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा, जिससे मुझे बहुत निराशा हुई है।” उन्होंने आगे कहा कि सरकार को लाभार्थियों को ई-केवाईसी प्रक्रिया के बारे में अधिक जानकारी प्रदान करनी चाहिए थी।
इसी तरह, नांदेड़ की श्रीमती सुनीता पाटील ने बताया कि उनके पास आधार कार्ड नहीं है, जिसके कारण वे ई-केवाईसी प्रक्रिया को पूरा नहीं कर पाईं। “मैं सरकार से अनुरोध करती हूं कि मुझे इस योजना का लाभ मिल सके,” उन्होंने कहा।
अधिकारियों का रुख और आगे की कार्रवाई
अधिकारियों का कहना है कि ई-केवाईसी प्रक्रिया को अनिवार्य किया गया था ताकि योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। “ई-केवाईसी के माध्यम से, हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि वित्तीय सहायता केवल पात्र लाभार्थियों तक ही पहुंचे,” श्री अजय कुमार ने कहा।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार जल्द ही एक नई ई-केवाईसी अभियान शुरू करेगी, ताकि उन लाभार्थियों को फिर से योजना में शामिल किया जा सके जिन्होंने अभी तक ई-केवाईसी अपडेट नहीं किया है। इस अभियान के तहत, लाभार्थियों को ई-केवाईसी प्रक्रिया को पूरा करने में मदद करने के लिए विशेष शिविर लगाए जाएंगे।
अधिक जानकारी के लिए, आप बिहार सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर जा सकते हैं। यह योजना बिहार में भी लागू है और राज्य सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई अन्य योजनाएं भी चला रही है। बिहार सरकार की वेबसाइट पर आपको इन योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी मिल जाएगी।
इस मामले पर और जानकारी के लिए, आप पटना में आवश्यक सामग्री की समीक्षा – बिहार ब पर भी जा सकते हैं।
