पटना, 1 अप्रैल 2026: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म है। लेकिन, जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के कई नेता मुख्यमंत्री के इस्तीफे को टालने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के वरिष्ठ नेता नीतीश कुमार को कम से कम 15 मई तक अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं।
पार्टी में इस्तीफे को लेकर असहमति
जेडीयू के भीतर इस्तीफे को लेकर मतभेद उभर कर सामने आ रहे हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने हालांकि नीतीश कुमार के फैसले का सम्मान करने की बात कही है, लेकिन कई अन्य नेता इस फैसले से सहमत नहीं हैं। पूर्व मंत्री और जेडीयू के वरिष्ठ नेता श्रवण कुमार ने आज पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “नीतीश जी बिहार के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। उनका इस्तीफा राज्य के लिए एक बड़ी क्षति होगी।” उन्होंने आगे कहा कि पार्टी के सभी सदस्य मिलकर नीतीश कुमार को मनाने की कोशिश करेंगे।
सूत्रों की मानें तो, जेडीयू के कुछ नेता नीतीश कुमार को 2029 तक मुख्यमंत्री बने रहने के लिए राजी करने की योजना बना रहे हैं। उनका तर्क है कि नीतीश कुमार की राजनीतिक अनुभव और दूरदर्शिता बिहार के लिए बेहद जरूरी है। पार्टी के एक सूत्र ने बताया कि नीतीश कुमार को मनाने के लिए एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल जल्द ही उनसे मुलाकात करेगा।
2010 से लगातार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
नीतीश कुमार 2005 से लेकर अब तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे हैं, सिवाय 2015-2017 के जब उन्होंने तेजस्वी यादव के साथ महागठबंधन सरकार बनाई थी। उन्होंने 2010 में लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद संभाला और तब से बिहार में सुशासन स्थापित करने का प्रयास किया है। नीतीश कुमार ने अपने कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण विकास कार्य किए हैं, जिनमें सड़कों का निर्माण, शिक्षा का प्रसार और स्वास्थ्य सेवाओं का सुधार शामिल है।
विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया
नीतीश कुमार के इस्तीफे की खबर से विपक्षी दलों में भी हलचल मच गई है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह बिहार के लिए एक नई शुरुआत होगी। उन्होंने कहा, “नीतीश कुमार ने लंबे समय तक बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब समय आ गया है कि युवा पीढ़ी को आगे आने का मौका मिले।”
लेकिन, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने नीतीश कुमार के इस्तीफे को लेकर जेडीयू पर निशाना साधा है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार का इस्तीफा जेडीयू की आंतरिक कलह का परिणाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बार-बार पाला बदलते रहे हैं।
आर्थिक स्थिति और चुनौतियां
बिहार की आर्थिक स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण है। राज्य की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। नीतीश कुमार सरकार ने राज्य में निवेश को आकर्षित करने और रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए कई प्रयास किए हैं, लेकिन अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। 2024-25 के बजट में, राज्य सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की घोषणा की है। बिहार सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर बजट से संबंधित विस्तृत जानकारी उपलब्ध है।
और, नीतीश कुमार के इस्तीफे से राज्य की राजनीतिक और आर्थिक स्थिति पर क्या असर पड़ेगा, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल, जेडीयू के नेता नीतीश कुमार को मनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसला नीतीश कुमार का ही होगा।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार ने अपने करीबी सहयोगियों से कहा है कि वह अब राजनीति से संन्यास लेना चाहते हैं। लेकिन, जेडीयू के नेता उन्हें मनाने की कोशिश कर रहे हैं कि वह कम से कम 2029 तक मुख्यमंत्री बने रहें। बिहार सरकार के पोर्टल पर राज्य से जुड़ी नवीनतम जानकारी उपलब्ध है।
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