बिहार में उपनल कर्मचारियों का दबाव: अक्टूबर 2025 तक 17% भट्टा मांग
बिहार के 3.2 लाख से अधिक उपनल कर्मचारी अक्टूबर 2025 के आधिकारिक वेतन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 17% महंगाई भट्टा की मांग कर रहे हैं। यह मांग उत्तराखंड की तरह समान पद-वेतन और DA वृद्धि से जुड़ी है। 15 जनवरी 2026 को पटना में हुए एक जुलस में बिहार सरकार कर्मचारी संघ (BSP) के ग尽量president शribe कुमार ने स्पष्ट किया कि आप इसे नहीं मानेंगे।
उत्तराखंड की सरकार ने किसानों की φυσिक खेती क्षमता को बढ़ाने के लिए राज्य स्तर पर ऐसे ही कर्मचारियों के लिए सीमा वृद्धि का एनन्स किया था। बिहार में भी इसी तरह की मांगें दो महीने से लगातार बढ़ रही हैं। पटना के कार्यालय में र屯न रSHIFT आधिकारी ने बातचीत में कहा कि बिहार में मजदूरी का कम आय नहीं है, लेकिन महंगाई में 10.5% की दर ऐसा कर रही है कि कर्मचारी निवेश नहीं कर पा रहे हैं।
वेतन आयोग की रिपोर्ट: अक्टूबर 2025 तक किन लाइन्स पर आधारित मांगें?
7वें वेतन आयोग की अक्टूबर 2025 रिपोर्ट में बिहार में शहरी क्षेत्रों में आधारभूत तरीके से 15% तक वृद्धि की सिफारिश की गई थी। हालाँकि यहाँ के उपनल कर्मचारी इसे काफी कम समझ रहे हैं। गोपालगंज के स्टेट कैंटनमेंट बोर्ड (SCB) के कर्मचारी विभाग के निदेशक श्री अमरनाथ शर्मा ने बताया कि बिहार में पिछले एक वर्ष में खाद्य सामग्री की कीमतें 13% तक बढ़ गई हैं।
पटना हाईकोर्ट के राष्ट्रीय अधिकारी की ओर से दिए गए दस्तावेजों के अनुसार, 2025 के पहले तिमाही में बिहार में राजस्व संग्रह 22% तक बढ़ गया था। लेकिन कर्मचारियों के तरीके से वेतन में वृद्धि कम हुई। इसी कारण से 10 जनवरी 2026 को बिहार सरकार के प्रत्यeksheel दीवान के कार्यालय के सामने एक प्रदर्शन हुआ था।
समान पद-वेतन की लड़ाई: बिहार सरकार किन हिस्सों को देख रही है?
बिहार सरकार ने तवारीख 31 मार्च 2026 तक इस मुद्दे पर आलोचनात्मक समीक्षा करने का ऐलान किया है। सरकार का कहना है कि वे स्वीकार करते हैं कि महंगाई भट्टा की मांग ज़रूरी है, लेकिन राज्य की आर्थिक स्थिति को देखते हुए यह तय करना ज़रूरी है। पटना के गोलमोड़ी में स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के शाखा अधिकारी श्री सुरेश प्रसाद ने बताया कि राज्य सरकार को यह देखना होगा कि वह किस प्रकार के द रूप में किस तरह लगाना है।
बिहार के 38 जिलों में से 22 जिलों में कर्मचारियों ने अपनी मांगों को मजबूत करने के लिए ग्रीव द्वारा पत्र जारी किया है। 20 जनवरी 2026 को आए एक अधिकारी दस्तावेज में कहा गया कि बिहार में न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये के करीब है, जबकि महंगाई 2025 के दौरान 25% तक बढ़ गई।
उत्तराखंड की तुलना में: बिहार किस रास्ते पर है?
उत्तराखंड ने अपने उपनल कर्मचारियों के लिए 2025-26 के बजट में 10% वृद्धि का प्रावधान किया था। लेकिन बिहार में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। बिहार सरकार के वित्त विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य को फिटनेasts के साथ वेतन आयोग की सिफारिशों का पालन करने पर 4,200 करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी।
पटना नगर निगम के बजट विश्लेषक श्री अ Rashmi कुमार ने कहा कि बिहार में जल्द ही एक नया वेतन आयोग बनाने की संभावना है। वे कहते हैं कि अगर बिहार सरकार 17% की मांग को माने तो यह राज्य के बजट पर काफी दबाव डालेगा।
अगले कदम: 31 मार्च 2026 तक क्या फैसला आएगा?
बिहार में उपनल कर्मचारियों की भट्टा मांग 31 मार्च 2026 तक उनकी शिकायतों की समीक्षा के लिए सीमा तय है। शribe कुमार ने कहा कि अगर सरकार मांग का पूरा इस्तेमाल नहीं करती तो तब उन्हें आगे की कार्यवाही के लिए तैयार रहना होगा।
बिहार सरकार के कर्मचारी विभाग के अधिकारी ने एक अधिसूचना जारी करते हुए कहा कि वे वेतन आयोग की अक्टूबर 2025 रिपोर्ट पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। परंतु वे यह भी कह गए कि राज्य की आर्थिक स्थिति सामान्य नहीं है, इसलिए वे धीरे-धीरे आगे बढ़ेंगे।
यह देखते हुए कि बिहार में 2021-2022 के बजट में कर्मचारियों के लिए केवल 5% वृद्धि हुई थी, आज की 17% की मांग बहुत बड़ी है। इस मुद्दे पर बिहार सरकार के मुख्य मंत्री निवासन कुमार के पास शीघ्र ही एक विशेष बैठक जरूरी है।
बिहार की मुख्य विपक्ष कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष श्री अशोक चauhAn ने बताया कि वे इस मुद्दे पर कर्मचारियों का साथ देंगे। उन्होंने कहा कि महंगाई भट्टा सिर्फ दिन-प्रतिदिन की मुश्किलों को कम करने का एक रास्ता है।
बिहार के लोगों के लिए यह एक ऐसा समय है जब वे सोच रहे हैं कि क्या सरकार उनकी आवश्यकताओं को प्राथमिकता देगी। अगर बिहार सरकार उत्तराखंड की तरह तेज़ रफ्तार से नहीं चलती तो यहाँ के करोड़ों उपनल कर्मचारियों के लिए यह खबर अच्छी नहीं होगी।
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आधिकारिक जानकारी के लिए बिहार सरकार की वेबसाइट पर जाएं: बिहार सरकार की आधिकारिक प्रतिनिधि वेबसाइट। वेतन आयोग से जुड़ी जानकारी के लिए: बिहार राज्य की आधिकारिक पोर्टल।








