पटना हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। धारा 107 के तहत कार्यवाही को रद्द कर दिया है। यह केवल सार्वजनिक शांति के लिए है। व्यक्तिगत डर के लिए नहीं।
कोर्ट का तर्क है कि धारा 107 के तहत कार्यवाही केवल तभी शुरू की जा सकती है जब सार्वजनिक शांति को खतरा हो। और यह खतरा वास्तविक होना चाहिए। व्यक्तिगत डर के मामले में यह धारा लागू नहीं होती है, जो कि एक महत्वपूर्ण बात है।
यह फैसला एक विशिष्ट मामले में आया है। जिसमें एक व्यक्ति के खिलाफ धारा 107 के तहत कार्यवाही शुरू की गई थी। व्यक्ति ने कोर्ट में कहा कि यह कार्यवाही गलत है। और इसे रद्द किया जाना चाहिए, जो कि एक सामान्य-demand है।
But कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद कहा कि धारा 107 के तहत कार्यवाही को रद्द किया जाता है। यह फैसला सार्वजनिक शांति के लिए है, व्यक्तिगत डर के लिए नहीं। It’s done.
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