3 अप्रैल 2026 की सुबह 6 बजे के आसपास, जैसलमेर जिले के रामथर और मोड़ क्षेत्रों में तेज़ी से बदले मौसम की वजह से 2.5 सेमी ओला गिरा। जैसलमेर सहित राजस्थान के कम से कम 7 जिलों में ओलावृष्टि के साथ अतिरिक्त बारिश भी हुई, जिससे गेहूँ और सरसों की फसलों को गंभीर नुकसान पहुँचा। आईएमडी (IMD) पुणे का क्षेत्रीय मौसम विभाग ने उसी दिन दूर-दूर तक फैलने वाली ओलावृष्टि के लिए आपातकालीन चेतावनी जारी की।
बारिश के पीछे की स्थिति को देखते हुए, बीकानेर जिले के नेहरू नगर में 1.2 इंच (30 मिमी) और जोधपु र के बालोटरा में 0.9 इंच (23 मिमी) तक वर्षा का आंकड़ा दर्ज किया गया। जिले के मुख्य मौसम अधिकारी आर्जुन सिंह ने बताया, “यह तेज़ वर्षा केवल 40 मिनट तक जारी रही, लेकिन इसमें आए ओले की गोलाई बड़ी थी।” वर्षा के दौरान बीकानेर शहर के कई इलाकों में बिजली के खंडे भी गिर गए।
वर्षा का सितारा उज्जवल राजस्थान के स्काडिनविया स्युअर फार्मवाले लोंगストॉक के हिस्से के लिए खतरनाक साबित हुआ। जैसलमेर जिले में गायक गांव के किसान शुभम की फसल में आए ओले ने 15% उत्पादन कटौती का कारण बना। शुभम ने कहा, “मैंने अभी-अभी गेहूँ की फसल काट ली थी, ओले ने सभी ड Corsa̧ti काट दिए। मेरे पास ओसाका किसान बीमा की पॉसी नहीं है।” इससे जुड़े आंकड़ों के अनुसार, मुख्य रूप से जैसलमेर और बीकानेर में हुई ओलावृष्टि में 800 एकड़ से अधिक फसल प्रभावित हुई।
राजस्थान सरकार के कृषि विभाग के अनुमान के मुताबिक, ओला और बारिश के कारण कृषि क्षति का मूल्य 80 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। जैसलमेर जिले में सरसों की फसल पर आए ओले ने उसके बाजार मूल्य को कम कर दिया। सीक्रेटरी कृषि विभाग, राजस्थान, एस.एन. शर्मा ने बताया, “हमने तुरंत एक अधिसूचना जारी की है। प्रभावित किसानों को 2.3 करोड़ रुपये की राहत राशि देने की योजना बनाई गई है।” यह राशि राजस्थान आपदा रिड्रीम फंड से दी जाएगी।
आईएमडी पुणे ने अप्रैल 4 और 5 को पश्चिमी राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में ओलावृष्टि और तेज़ बारISH की संभावना बनाई रखी। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह तेज़ बदलाव उच्च पवन दिशा (जेटस्ट्रीम) के कारण हुआ है। पंजाब के लुधियाना में आ هج了他 28 मार्च की तुलना में 3 अप्रैल की रात में जैसलमेर में 12 मिमी से अधिक वर्षा का आंकड़ा दर्ज किया गया, जो पिछले 10 वर्षों में सबसे अधिक है।
अप्रैल 2026 की इस ओलावृष्टि ने मार्मिक चिंता जगाई है। 2024 और 2025 के दशक में ऐलानाबाद दाना ने राजस्थान के पश्चिमी जिलों में ऐसी ही ओलावृष्टि को ध्यान में रखते हुए किसानों को सीजनल फारेकास्टिंग का मार्ग दिखाया था। इस बार ऐसा नहीं हुआ। शर्मा सीक्रेटरी ने कहा, “हम अब ऐसे अप्रत्याशित मौसमपरिवर्तन के लिए तैयार हैं। प्रत्येक जिले में मोबाइल अलर्ट सिस्टम सक्रिय है।”
वर्षा के बाद से जैसलमेर, बीकानेर और जोधपुर में सर्दी का मौसम गर्मी में बदलने लगा है। 3 अप्रैल की शाम की तापमान पुरे राजस्थान में पिछले साल के समय के मुकाबिल 3-4 डिग्री सेल्सियस अधिक रही। विश्लेषकों का मानना है कि यह परिवर्तन मानव जैविक उत्सर्जन से जुड़े जलवायु परिवर्तन का ही सिद्धांत है। नेत्रालय अधिकारी ने बताया कि इस बार ओला आने के पहले के अंदाज में किसी तरह के चेतावनी का संकेत नहीं था।
राजस्थान सरकार ने ऐसे घटनाओं के लिए एक विशेष तंत्र तैयार कर लिया है। शर्मा ने कहा, “हमने 2026-27 के लिए नए डिसास्टर मैनेजमेंट प्लान को मंजूरी दे दी है। इसमें फसल बीमा के लिए प्रोत्साहन भी बढ़ाए गए हैं।” ऐसे महत्वपूर्ण मौसमपरिवर्तन की सूचना सार्वजनिक करने के लिए सोशल मीडिया पर #RajasthanWeather हैशटैग भी बढ़ रहा है। जैसलमेर के एक स्थानीय नेता, कुंवर सिंह ने दावा किया, “हमने पार्श्वीय दिशाओं से आने वाली हवाओं का विश्लेष किया, ओला के पीछे दूरस्थ पवन पैटर्न ही जिम्मेदार हैं।” वे मांग कर रहे हैं कि ओलावृष्टि के प्रभावित इलाकों को अलग से योजना बनाने की आवश्यकता है।
IMD ने अप्रैल 6 तक पश्चिमी राजस्थान में माइक्रो-स्केल ओलावृष्टि की संभावना बनाई रखी है। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में भी हल्की बारिश का अनुमान है। इस दौरान कई विकासमार्गों पर यात्रा विघटित हुई है। जयपुर से जैसलमेर जाने वाली नेशनल हाईवे 125 पर दो घंटे के लिए ट्रैफिक रुक गया। राजस्थान पुलिस ने कार्रवाई के लिए तैयारी दर्ज करते हुए कहा कि ओले के कारण असफलता के दौरान सहायता के लिए 112 पर फोन करना है।
दिन प्रतिदिन बढ़ते उज्ज्वलता के साथ, मौसम विशेषज्ञ अब कृषि ऋतु के दौरे पर भी ईर्श्या व्यक specify कर रहे हैं। अगले सात दिनों में मध्य पश्चिमी राजस्थान में दिन के समय तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने की संभावना है। पारंपरिक रूप से, ऐलानाबाद की तुलना में पश्चिमी राजस्थान में ऐसी ओलावृष्टि कम ही होती है, लेकिन इस बार तेज़ी से बदले मौसम ने समझौते को नोट किया है।
इस ओलावृष्टि में कुल कार्यक्रम 7 जिले शामिल हैं: जैसलमेर, बीकानेर, जोधपुर, बारमेर, पाली, जयपुर(पश्चिमी हिस्से) और सीकर। इनमें से हर जिले में कृषि विभाग की टीम ने नोटिस जारी कर फसलों का सर्वेक्षण शुरू कर दिया है। 5 अप्रैल तक सभी प्रभावित किसानों के नाम अद्यतन किये जाएंगे। आईएमडी की अपेक्षा है कि अगले दिन की स्युअर फार्मवाले लोंगस् ट्रॉक के साथ मुस्कुराने वाले इलाकों में बारिश का स्तर कम हो जाएगा।
राजस्थान सरकार की तरफ से शुक्रिया संदेश दिए गए हैं जिसमें कहा गया कि ओलावृष्टि एक अप्रत्याशित घटना थी, लेकिन आपदा प्रबंधन तंत्र कार्यक्षम रहा। गृह विभाग के एक अधिकारी ने बताया, “हमने तुरंत राहत संचार नेटवर्क को सक्रिय किया।” आपदा पहुँचने पर टीम प्रभावित गांवों में पहुंच गई है। जैसलमेर जिले में सरकारी मूल्य रहित पाशु चिकित्सा शिविर भी स्थापित किए गए हैं।
एक प्रमुख मौसम विश्लेषक, डॉ. रविंद्र सिंह ने कहा, “aise तेज़ ओलावृष्टि पश्चिमी राजस्थान में मार्च के अंत तक आम नहीं होती। इस बार ओले परमाणविक पैमाने पर साइज के थे। हम अब जलवायु परिवर्तन के इस प्रभाव से जूझना पड़ेगा।” वह भी इलाज के लिए सलाह देते हुए कहा कि फसल बीमा के साथ-साथ ओला लक्षित क्षेत्रों में ठंडे पानी के पंप भी तैयार किए जाने चाहिए।
अन्य दिशाओं में, अप्रैल की पहली सप्ताह तक पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में गर्म हवा के प्रवाह के कारण तापमान में वृद्धि की संभावना है। पटना रेगियनल मौसम केंद्र ने पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में सर्दी की बढ़ती आ空间 में तेज़ हवा के प्रवाह की पूर्वानुमानित ओर में अधिकतम 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचने की संभावना बताई। हालांकि, ओलावृष्टि की ओर से राजस्थान की समस्या हमारे देश में आगे को मानवीय एक्सटेंसेबल नहीं है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अप्रैल 5 और 6 के लिए पश्चिमी मध्य ప్రदेश, छत्तिसगढ़ और ओडिशा के कुछ हिस्सों में भी ओलावृष्टि की संभावना बनाई रखी है। इस साल की वर्षा लगातार बढ़ने के कारण कई क्षेत्रों में सूखा रोकने का कार्य भी किया जा रहा है। नई दिल्ली के मौसम विश्लेषकों ने राजस्थान में हुई ओलावृष्टि को जलवायु परिवर्तन के संकेत के रूप में देखने की जरूरत पर जोर दिया है।
अंत में, ओलावृष्टि का प्रभाव सिर्फ कृषि तक सीमित नहीं रहा। बारिश के साथ जैसलमेर में बिना मुख्य कारण के बिजली के खंडे गिरे, जिससे 2000 से अधिक उपभोक्ताओं की आपूर्ति प्रभावित हुई। जैसलमेर जिले के इलेक्ट्रिसिटी डीपार्टमेंट ने पता चला कि पंखे और एसी मशीनों के कारण ओले से ट्रांसफॉर्मर के ऊपरी मार्ग में दबाव बढ़ गया था। सभी प्रभावित क्षेत्रों में पुनः पूर्ण आपूर्ति 10 अप्रैल तक होने का अनुमान है।
यह ओलावृष्टि सिर्फ मौसम की घटना नहीं, बल्कि हमारे देश के कृषि प्रणाली और आपदा प्रबंधन तंत्र की चुनौती भी है। अगले उपएंग्रों में ऐसी घटनाओं की बढ़ती बारमossibility जलवायु परिवर्तन के तेज प्रभाव का प्रमाण है। जलवायु अनुकूलन की दिशा में कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है, यही राजस्थान की ओलावृष्टि की मुख्य सीख है।







