भहरापुर के जर्दालु आम राष्ट्रपति को हर साल उपहार में, कारण और प्रक्रिया विस्तार से
भहरापुर के जीआई‑टैग वाले जर्दालु आम राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित वीवीआईपी को हर साल क्यों भेजे जाते हैं, उनके पैकिंग से वितरण तक की पूरी प्रक्रिया पढ़ें।
भहरापुर के जर्दालु आम राष्ट्रपति को उपहार में भेजे जाते हैं। इस विशेष प्रथा की पृष्ठभूमि, पैकिंग प्रक्रिया और जीआई‑टैग की महत्वता का विस्तृत विवरण यहाँ है।
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भहरापुर के जर्दालु आमों को राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा स्पीकर, राज्यपाल और कई मुख्यमंत्री सहित महत्त्वपूर्ण वीवीआईपी को हर साल उपहार के रूप में भेजा जाता है। यह जानकारी टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक प्रत्येक वर्ष 125 क्विंटल से अधिक जर्दालु आम इन उच्च स्तर के अधिकारीयों तक पहुँचाए जा रहे हैं।
जर्दालु आम की लोकप्रियता में वृद्धि का प्रमुख कारण प्रधानमंत्री द्वारा 1 जून को अपनी महीने भर की रेडियो प्रसारण मन की बात में इस फल का उल्लेख है। उन्होंने कहा कि इस फल की ख़ास सुगंध और मिठास को दूर से ही पहचाना जा सकता है और इसे स्थानीय उत्पादन का सफल उदाहरण बताया, जिसने अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी जगह बनायी है। इस बयान ने जर्दालु आम की मांग को और बढ़ा दिया।
जर्दालु आमों की पैकिंग प्रक्रिया विशेष रूप से सुलभ और नियंत्रित है। महेशी‑तिलकपुर गाँव, सूलतानगंज ब्लॉक में स्थित मधुबन फार्म में ताज़ा कटे हुए आमों को प्लास्टिक बॉक्स में पैक किया जाता है। इस प्रक्रिया की निगरानी बिहार कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा की जाती है।
पैकिंग के बाद आमों को बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (BIADA) के सिक्षणपुर (बीथा) स्थित सुविधा में भेजा जाता है। यहाँ पर आमों की चयन, ग्रेडिंग और 5‑6 किलो के उपहार बॉक्स में पुनः पैकिंग की जाती है। इस चरण में आमों की गुणवत्ता मानक के अनुसार जांची जाती है और फंगस व रोग मुक्त सुनिश्चित किया जाता है।
तैयार उपहार पैकेज को तत्पश्चात दिल्ली स्थित बिहार भवन को भेजा जाता है, जहाँ से राज्य सरकार के प्रतिनिधियों द्वारा विभिन्न वीवीआईपी को वितरित किया जाता है। इस वितरण में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री समेत कई प्रमुख राजनैतिक हस्तियों को विशेष पैकेज प्रदान किए जाते हैं।
जर्दालु आम को 28 मार्च 2018 को भौगोलिक संकेत (GI) टैग प्राप्त हुआ। यह टैग इस फल की अनोखी खुशबू, स्वाद तथा केवल भहरापुर क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी में ही विकसित होने की विशिष्टता को मान्यता देता है। जीआई टैग के बाद जर्दालु आम को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर मूल्य मिला है, जिससे स्थानीय किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
जर्दालु आम का रंग हल्का पीला, फल का गूदिया रसदार और स्वाद मीठा-टैंगी मिश्रित है। इसका विशेष सुगंधित अरोमा इसे अन्य आमों से अलग पहचान देता है। इस विशेषता के कारण इसे “भहरापुर का रत्न” कहा जाता है और बिहार सरकार इसे राज्य के सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में बढ़ावा देती है।
सरकार की इस पहल का उद्देश्य जर्दालु आम को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करके बिहार की कृषि क्षमता को उजागर करना है। इस तरह के उपहारों से राज्य की कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलती है और आगे चल कर निर्यात के अवसर बढ़ते हैं।
बिहार सरकार ने इस प्रक्रिया को नियमित रूप से जारी रखने की घोषणा की है और भविष्य में जर्दालु आम के साथ ही अन्य जीआई‑टैग वाले उत्पादों को भी वीवीआईपी को उपहार में देने की योजना बनाई है। इससे न केवल स्थानीय किसानों को आर्थिक लाभ मिलेगा, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक विरासत को भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।
वर्तमान में, जर्दालु आमों की मांग मौसमी रूप से बढ़ती रहती है और इस वर्ष भी 125 क्विंटल से अधिक उत्पादन को वीवीआईपी को भेजने की योजना बनी हुई है। कृषि विभाग ने उल्लेख किया कि इस प्रक्रिया में बायो‑फर्टिलाइज़र और निरंतर जल प्रबंधन के माध्यम से फल की गुणवत्ता को उच्च स्तर पर बनाए रखा जाता है।
संक्षेप में, जर्दालु आम की यह वार्षिक उपहार परंपरा केवल एक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि बिहार की कृषि, संस्कृति और आर्थिक विकास की द्योतक है। राष्ट्रपति तक पहुंचने वाले इस मीठे फल से राज्य की क्षमताओं का परिचय मिलता है और आगामी वर्षों में और अधिक विस्तार की संभावना बनी हुई है।
