पैतली के हाई कोर्ट में सात नए न्यायाधीशों की शपथ—रैंकन जहा, कुमार मनिश, राज कुमार और एडिशनल जज
16 जून 2026 को पाटना हाई कोर्ट में सात नए न्यायाधीशों को शपथ दी गई। नई नियुक्तियों में न्यायमूर्ति रैंकन क़ुमार जहा, कुमार मनिश, राज क़ुमार तथा अतिरिक्त न्यायमूर्ति राणा विजयम सिंह, विकाश कुमार, गिरीजीश कुमार और आलोक कुमार शामिल हैं।
पाटना हाई कोर्ट ने 15 जून 2026 को सात नए न्यायाधीशों को शपथ दिलाई। नई नियुक्तियों के साथ केंद्रीय सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण मामलों पर भी निर्णय लिया, जैसे कि 319 सिक्शन के तहत मर्डर केस में पिताओं को बुलाने वाले आदेश को खारिज करना।
पाटना हाई कोर्ट, न्यायाधीश नियुक्ति, रैंकन क़ुमार जहा, कुमार मनिश, आयुर्वेद, साइबर कानून, त्रुटि, 319 क्रिमिनल प्रोसीजर कोड, पार्टनरशिप, शपथ
पाटना हाई कोर्ट ने 15 जून 2026 को नवीनता के साथ सात नए न्यायाधीशों को शपथ दिलाकर अपने न्यायिक ढाँचे को सुदृढ़ किया। शपथ समारोह की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश मिनाक्षी मादन राय ने की, जिनका नाम पहले सिक्किम हाई कोर्ट से जुड़ा हुआ था। इस समारोह में न्यायमूर्ति रैंकन क़ुमार जहा, कुमार मनिश और राज क़ुमार को स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया, जबकि राणा विजयम सिंह, विकाश कुमार, गिरीजीश कुमार और आलोक कुमार को अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नामित किया गया। ये नियुक्तियाँ केंद्र सरकार के निर्णय के अनुसार हुईं और इनके जारी होने की सूचना 10 जून 2026 को प्रकाशित हुई।
आयोग द्वारा इस निर्णय के पीछे की तर्कसंगतता यह थी कि पाटना हाई कोर्ट को निरंतर सुधार और अधिक दक्ष बनाना आवश्यक था। खासकर हाल के वर्षों में अदालत में दाखिल मामलों की संख्या में तेजी से वृद्धि होने के कारण न्याय प्रणाली पर अतिरिक्त भार पड़ा था। इस नई नियुक्तियों से न्यायालय की कार्यवाही में तेजी आने और वकीलों के लिए अधिक न्यायिक अनुभव प्राप्त करने की आशा है।
न्यायमूर्ति रैंकन क़ुमार जहा, कुमार मनिश और राज क़ुमार को पाटना हाई कोर्ट में लंबे समय से कार्यरत वकील के रूप में पहचाना गया है। उनकी नियुक्ति के साथ अपेक्षा है कि वे व्यावसायिक, कर और प्रक्रियागत मामलों में अपने अनुभव को अदालत के अनुकूल ढंग से लागू करेंगे। वहीं, अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति से अदालत की कार्यकारी क्षमता में विस्तार और न्यायिक कार्यभार के संतुलन में सुधार की उम्मीद है।
नई नियुक्तियों के साथ-साथ पाटना हाई कोर्ट में एक महत्वपूर्ण निर्णय भी लिया गया। न्यायाधीश अन्सुल ने एक सिंगल जज बेंच के रूप में सेक्शन 319 क्रिमिनल प्रोसीजर कोड के तहत मर्डर केस में व्यक्तियों को बुलाने वाले आदेश को खारिज कर दिया। यह निर्णय इस आधार पर लिया गया कि मौजूदा सबूत “पर्याप्त नहीं” थे और प्रक्रिया में “दुष्ट इरादे” की संभावना थी। इस फैसले के बाद आरोपी पर मुकदमे का प्रारम्भ स्थगित किया गया और अदालत ने नए सबूतों की मांग की।
इसके अतिरिक्त, पाटना हाई कोर्ट ने साउथ बिहार पावर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी लिमिटेड (एसबीपीडीसीएल) के तीन वर्ष के ब्लैकलिस्टिंग के आदेश को भी पुष्टि की। इस निर्णय में अदालत ने कहा कि राज्य सरकार और उसकी सहायक संस्थाओं के पास ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने का अन्तर्निहित वैधानिक अधिकार है, चाहे कॉन्ट्रैक्ट में स्पष्ट प्रावधान हो या न हो। यह निर्णय पावर सेक्टर में कॉन्ट्रैक्ट प्रबंधन के मानदंडों को स्पष्ट करता है।
एक अन्य महत्वपूर्ण मामले में, पाटना हाई कोर्ट ने सैंड गाट्स के स्वचालित विस्तारित इलेक्ट्रॉनिक नीलामी (ई-ऑक्शन) के दौरान जमा किए गए बोली को वैध ठहराया। न्यायाधीश सुधीर सिंह और शैलेन्द्र सिंह की डिवीजन बेंच ने यह फैसला देते हुए कहा कि विस्तारित विंडो का संचालन “पूरी तरह से प्रणालीगत” था और किसी भी मैन्युअल हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं थी। इस फैसले से यह स्पष्ट हुआ कि ई-ऑक्शन प्रक्रियाएँ पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुदृढ़ हैं।
वहीं, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने अपराधी पुनरावलोकन याचिका (क्रिमिनल रिवीजन पेटीशन) के समाप्त होने के आदेश को अपील करके रोका, यह तर्क देते हुए कि एक पक्ष को बार-बार अवसर मिलने के बाद स्वयं से प्रक्रिया को बंद करने का अधिकार नहीं मिलता। यह निर्णय उसी तर्क पर आधारित था कि कानून की सख्ती और न्याय की निष्पक्षता को बनाए रखना आवश्यक है।
इन सभी फैसलों और नियुक्तियों के बीच, प्रत्यक्ष रिपोर्टर के अनुसार, पाटना हाई कोर्ट ने न्यायिक विवेक को बढ़ाने के साथ-साथ प्रक्रियागत सुधारों को भी आगे बढ़ाया है। नई नियुक्तियाँ व कानूनी निर्णयों का संयोजन यह दर्शाता है कि बिहार की न्यायपालिका अपने कार्यभार को दक्ष एवं पारदर्शी बनाने के प्रति दृढ़ संकल्पित है। यह कदम न केवल पीड़ितों और वादियों के लिए कानूनी सहायता को बेहतर बनाएगा बल्कि केंद्रीय और राज्य सरकारों के बीच सहयोग को भी मजबूत करेगा।
Source: https://www.livelaw.in/high-court/patna-high-court
