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Bihar Education System: बिहार में हिंदी के टीचर पढ़ाएंगे अंग्रेजी और संस्कृत, शिक्षा विभाग का अजीब-गजीब फरमान

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Bihar Education System: बिहार में हिंदी के टीचर पढ़ाएंगे अंग्रेजी और संस्कृत, शिक्षा विभाग का अजीब-गजीब फरमान

Bihar News: कहा जा रहा है कि शिक्षा विभाग के इस आदेश से सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य अंधकार में पड़ सकता है. लोगों का कहना है कि हिन्दी से पीजी करने के बाद नौकरी पाने वाले टीचर भला अंग्रेजी और संस्कृत विषय को कैसे पढ़ा सकते हैं?

Bihar Education System: बिहार सरकार प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए तमाम तरह के दावे करती है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी दावा करते हैं कि उन्होंने अपने कार्यकाल में शिक्षा व्यवस्था में अमूलचूल सुधार किया है. इस बीच शिक्षा विभाग की ओर से एक ऐसा आदेश दिया गया है, जो चर्चा का विषय बन गया है. दरअसल, प्रदेश में अब हिंदी विषय के टीचर बच्चों को अंग्रेजी और संस्कृत भी पढ़ाएंगे.

शिक्षा विभाग के नए आदेश के मुताबिक, प्रदेश के सरकारी स्कूलों में मैट्रिक और इंटर के छात्रों को हिन्दी के टीचर संस्कृत और अंग्रेजी पढायेंगे. कहा जा रहा है कि शिक्षा विभाग के इस आदेश से सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य अंधकार में पड़ सकता है. शिक्षा विभाग ने सरकारी हाई स्कूलों में अब सिर्फ तीन शिक्षकों को रखने का फैसला लिया है, जो हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, उर्दू, बंगला, मैथिली, फारसी और अरबी भाषा जैसी तमाम भाषा पढ़ायेंगे.

बिहार सरकार ने पहले से तय कर रखा था कि हर हाई स्कूल के लिए कुल 11 पद होंगे. अब नया फरमान जारी किया गया है, जिसमें माध्यमिक विद्यालयों में पहले से निर्धारित 11 पदों में से 03 पदों की कटौती कर दी गयी है. मतलब अब हाई स्कूल के लिए 8 पोस्ट होंगे, जिसमें हेडमास्टर, टीचर से लेकर चपरासी शामिल हैं. शिक्षा विभाग के इस आदेश पर विवाद हो सकता है. लोगों का कहना है कि हिन्दी से पीजी करने के बाद नौकरी पाने वाले टीचर भला अंग्रेजी और संस्कृत विषय को कैसे पढ़ा सकते हैं?

बता दें कि शिक्षा विभाग के निदेशक ने 5 फरवरी को नया आदेश निकाला है. जिसमें शिक्षकों के पद को कम कर दिया गया है. नतीजा ये होगा कि हिंदी पढ़ाने के लिए नियुक्त हुए शिक्षकों को अंग्रेजी पढ़ाने की भी बाध्यता होगी. सरकार ने हाई स्कूलों में विज्ञान विषय में एक शिक्षक का पद रखा है.

वहीं, इंटर स्तर के स्कूलों में सरकार ने जन्तु विज्ञान (जूलॉजी) और वनस्पति शास्त्र (बॉटनी) में से एक ही पद स्वीकृत किया है. यानि जिसने जूलॉजी में पीजी किया है, उसे बॉटनी पढ़ानी होगी और जिसने बॉटनी की पढ़ाई की उसे जूलॉजी भी पढ़ानी होगी.

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