मुंबई, महाराष्ट्र – महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘लाड़की बहिन’ योजना के तहत 68 लाख लाभार्थियों के खाते ई-केवाईसी (e-KYC) नियमों का पालन न करने के कारण बंद कर दिए गए हैं। यह जानकारी गुरुवार को राज्य सरकार के अधिकारियों ने दी। इस फैसले से राज्य भर में महिलाओं में निराशा का माहौल है, क्योंकि कई लाभार्थी अब इस योजना के लाभ से वंचित हो जाएंगी।
ई-केवाईसी अनिवार्यता और खातों पर प्रभाव
महाराष्ट्र सरकार ने पिछले साल दिसंबर में ‘लाड़की बहिन’ योजना के तहत सभी लाभार्थियों के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य कर दिया था। इसका उद्देश्य योजना में पारदर्शिता लाना और धोखाधड़ी को रोकना था। अधिकारियों के अनुसार, 68 लाख लाभार्थियों ने निर्धारित समय सीमा तक अपने दस्तावेज़ों का सत्यापन नहीं कराया, जिसके कारण उनके खाते बंद कर दिए गए।
राज्य महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने बताया कि “हमने लाभार्थियों को ई-केवाईसी कराने के लिए कई बार नोटिस भेजा था और जागरूकता अभियान भी चलाए थे। लेकिन, कई लाभार्थियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। इसलिए, हमें यह कठोर कदम उठाना पड़ा।” उन्होंने आगे कहा कि सरकार जल्द ही एक और मौका देने पर विचार कर रही है, ताकि लाभार्थी अपने खाते फिर से सक्रिय करा सकें।
लाभार्थियों की प्रतिक्रिया और कठिनाइयाँ
मुंबई की निवासी 35 वर्षीय सुनीता पाटिल, जिनके खाते भी बंद कर दिए गए हैं, ने बताया, “मैं इस योजना के तहत मिलने वाली ₹1000 की सहायता से अपने बच्चों की शिक्षा का खर्च चलाती थी। अब मेरे खाते बंद हो जाने से मुझे बहुत परेशानी हो रही है।” इसी तरह, पुणे की रहने वाली 42 वर्षीय रेश्मा कुलकर्णी ने कहा कि उन्हें ई-केवाईसी प्रक्रिया के बारे में जानकारी नहीं थी और वे समय पर अपने दस्तावेज़ जमा नहीं कर पाईं।
कई लाभार्थियों ने यह भी शिकायत की कि उन्हें ई-केवाईसी प्रक्रिया में तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। नवी मुंबई के एक ग्रामीण इलाके में रहने वाली 50 वर्षीय कमला देवी ने बताया कि उनके पास स्मार्टफोन नहीं है और वे ई-केवाईसी कराने के लिए साइबर कैफे तक नहीं जा सकीं।
योजना का उद्देश्य और वर्तमान स्थिति
‘लाड़की बहिन’ योजना का उद्देश्य महाराष्ट्र राज्य की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इस योजना के तहत, पात्र महिलाओं को हर महीने ₹1000 की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। योजना की शुरुआत 15 अगस्त 2023 को पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने की थी।
अब तक, इस योजना के तहत लगभग 1.3 करोड़ महिलाओं को लाभान्वित किया जा चुका है। लेकिन, 68 लाख खातों के बंद होने से योजना की प्रगति पर असर पड़ सकता है। सरकार ने लाभार्थियों से अपील की है कि वे जल्द से जल्द ई-केवाईसी कराएं, ताकि वे योजना के लाभों का लाभ उठा सकें।
सरकार की पहल और आगे की योजना
राज्य सरकार ने ई-केवाईसी प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। अधिकारियों ने बताया कि अब लाभार्थी अपने नजदीकी बैंक शाखाओं में जाकर भी ई-केवाईसी करा सकते हैं। इसके अलावा, सरकार ने ग्रामीण इलाकों में विशेष शिविरों का आयोजन करने का भी फैसला किया है, ताकि लाभार्थियों को ई-केवाईसी कराने में मदद मिल सके।
अधिकारियों का कहना है कि वे यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि ‘लाड़की बहिन’ योजना का लाभ राज्य की सभी पात्र महिलाओं तक पहुंचे। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस मामले की समीक्षा कर रही है और जल्द ही एक नई नीति लेकर आएगी, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचा जा सके। अधिक जानकारी के लिए, आप बिहार सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर जा सकते हैं।
और जानकारी के लिए बिहार सरकार की वेबसाइट पर जाएँ।
