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आयुष्मान भारत योजना की कमियां

हाल ही में एक अध्ययन में पाया गया है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत हृदय रोगियों को लागत की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। यह अध्ययन 26 मार्च 2026 को प्रकाशित हुआ था और इसमें पाया गया है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत हृदय रोगियों को अपने इलाज के लिए अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।

आयुष्मान भारत योजना के तहत 10 करोड़ से अधिक परिवारों को स्वास्थ्य बीमा कवरेज प्रदान किया जा रहा है। इस योजना के तहत परिवारों को 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवरेज प्रदान किया जाता है। लेकिन हृदय रोगियों के लिए यह कवरेज पर्याप्त नहीं है।

डॉक्टर रोहन शर्मा ने कहा, “आयुष्मान भारत योजना के तहत हृदय रोगियों को अपने इलाज के लिए अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। इस योजना के तहत हृदय रोगियों को 5 लाख रुपये तक का कवरेज प्रदान किया जाता है, लेकिन हृदय रोगों के इलाज के लिए यह पर्याप्त नहीं है。”

आयुष्मान भारत योजना के तहत हृदय रोगियों को अपने इलाज के लिए अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। यह योजना 2018 में शुरू की गई थी और इसका उद्देश्य देश के गरीब परिवारों को स्वास्थ्य बीमा कवरेज प्रदान करना है। लेकिन इस योजना के तहत हृदय रोगियों को लागत की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

भारत सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के लिए 2022-23 में 12,954 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया था। लेकिन इस योजना के तहत हृदय रोगियों को लागत की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। आयुष्मान भारत योजना के तहत हृदय रोगियों को अपने इलाज के लिए अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।

आयुष्मान भारत योजना के तहत हृदय रोगियों को लागत की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। यह योजना देश के गरीब परिवारों को स्वास्थ्य बीमा कवरेज प्रदान करने के लिए शुरू की गई थी। लेकिन इस योजना के तहत हृदय रोगियों को अपने इलाज के लिए अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।

आयुष्मान भारत योजना के तहत हृदय रोगियों को लागत की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। यह समस्या देश के गरीब परिवारों के लिए एक बड़ा मुद्दा है। आयुष्मान भारत योजना के तहत हृदय रोगियों को अपने इलाज के लिए अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
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